हमारा प्रकाशन क्यों है विशेष

 

वर्तनी पब्लिकेशन की दो अलग-अलग शाखाएं हैं, एक साहित्यिक शाखा जो केवल साहित्यिक पुस्तकें प्रकाशित कर रही है और दूसरी प्रतियोगी शाखा जो केवल प्रतियोगी पुस्तकें प्रकाशित कर रही है। अन्य प्रकाशनों से कम दरों और बेहतर प्रस्तुतीकरण व सर्कुलेशन के साथ पुस्तकें प्रकाशित करना और पाठकों तक पहुँचाना हमारी प्रतिबद्धता है। हम देश के पहले ऐसे प्रकाशन हैं जो अपने रचनाकारों को अन्य किसी भी प्रकाशन से ज़्यादा मतलब 50 प्रतिशत रॉयल्टी दे रहे हैं.. ‘क्योंकि!रचनाकार का अधिकार है रॉयल्टी!’

हम-आप में से बहुत से ऐसे रचनाकार हैं जो उत्कृष्ट साहित्य-सृजन के बावजूद उससे मेहनताने या पुरस्कार के रूप में एक रुपया भी नहीं कमा पाते, हालांकि उनकीकिताबें बेचकर प्रकाशक भरपूर कमाई कर रहे हैं। न जाने कितने लेखकों और कवियों ने तो शायद ‘रॉयल्टी’ शब्द सुना भी नहीं होगा, रॉयल्टी रचनाकार का अधिकार है, लेकिन प्रकाशकों के लालच ने रॉयल्टी को विलुप्तप्राय बना डाला, रचनाकार दिन-ब-दिन बदहाल होते गए और प्रकाशक धन्ना सेठ हो बैठे। लेकिन अब दौर आ गया है कि रचनाकार अपने अधिकार के लिए उठ खड़े हों। देश के इक्का-दुक्का बड़े और बुज़ुर्ग रचनाकार बहुत लड़-झगड़कर रॉयल्टी पा भी रहे हैं लेकिन वो रॉयल्टी8 से 10 प्रतिशत ही है। ऐसे में वर्तनी पब्लिकेशन रचना की गुणवत्ता और मौलिकता की पड़ताल करके अपने हर रचनाकार को 50 प्रतिशत रॉयल्टी दे रहा है,उदाहरण के तौर पर डाक और पैकिंग ख़र्च घटाने के बाद जैसे किसी किताब के बिकने पर 100 रुपये प्राप्त होते हैं तो उसके रचनाकार को 50 रुपए मिल रहे हैं और पहली प्रति बिकते ही मिल रहे हैं, (जबकि अन्य प्रकाशनों द्वारा उन्हें कटी चवन्नी भी नहीं मिलती) अर्थात् किताब से हुई कमाई में आधा रचनाकार का और आधा प्रकाशक का। किताब के प्रकाशन का ख़र्च शुरू में रचनाकार वहन कर रहा है और यह ख़र्च घोषित तौर पर अन्य प्रकाशकों से कम है। इतना ही नहीं, पहले संस्करण की सभी प्रतियां बिक जाने पर अगले संस्करण का पूरा ख़र्च वर्तनी प्रकाशन वहन कर रहा है और रॉयल्टी पहले की तरह ही क़ायम रहेगी..